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यूपी: बंद स्कूलों में अधिकारियों ने कर दिया करोड़ों का घपला

UP School News
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यूपी में एक और घोटाले की आहट सुनाई दे रही है। मामला जुड़ा है कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों से। कोरोना संकट के दौरान जब राज्य में ये स्कूल बंद थे, तब भी सरकारी अधिकारी खर्च दिखाकर पैसे निकालते रहे। कुल 18 कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों के खातों से साल 2020-21 के सत्र के लिए तकरीबन 9 करोड़ रुपए निकाल लिए गए। मामला सामने आते ही शासन-प्रशासन में खलबली मच गई है। आनन-फानन में जांच कराकर जबाव-तलब किया गया है। आइए बताते हैं, पूरा मामला क्या है।

स्कूल बंद, खर्चा चालू

इस मामले को समझने के लिए आपको पहले कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों का सिस्टम समझना होगा। सरकार ने लगभग हर जिले में ऐसे विद्यालय खोले हैं। इन विद्यालयों में कम से कम 75% सीटें अनुसूचित जाति व जनजाति, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक वर्गों की लड़कियों के लिए रिजर्व होती हैं। बाकी 25% सीटें गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों की बेटियों के लिए होती हैं। यूपी सरकार के ये विद्यालय कक्षा 6 से लेकर 8वीं तक की लड़कियों के रहने-खाने और पढ़ाई आदि का पूरा जिम्मा उठाते हैं। इसके लिए हर स्कूल को बच्चियों की संख्या के हिसाब से बजट दिया जाता है।स्कूल ऑनलाइन ‘प्रेरणा पोर्टल’ पर स्टूडेंट्स की एंट्री करके हर महीने अपने बजट का पैसा निकाल लेते हैं।

लेकिन डेढ़ दर्जन विद्यालय ऐसे थे, जहां कोरोना काल के दौरान भी ये पैसा निकाला जाता रहा। विभाग ने जांच कराई तो पता चला कि 18 जिलों के विद्यालयों में ऐसी गड़बड़ियां हुईं। जब विद्यालय बंद थे। पढ़ने वाली लड़कियां अपने-अपने घरों पर थीं। फिर भी उनके खाने-पीने, रहने से लेकर पढ़ाई तक के हर खर्च के मद में पैसे स्कूल अधिकारी निकालते रहे। अलग-अलग मद में खर्चे दिखाते हुए करीब 9 करोड़ रुपए निकाल लिए गए।

मामला सामने आने के बाद राज्य के परियोजना निदेशक ने चिट्ठी लिखकर जबाव मांगा है। जिन 18 जिलों के अधिकारियों को जांच के आदेश भेजे गए हैं, वो हैं- बरेली, बिजनौर, देवरिया, फतेहपुर, गाजियाबाद, गोंडा, कासगंज (कांशीराम नगर), मऊ, मेरठ, मुरादाबाद, प्रतापगढ़, रायबरेली, संतकबीरनगर, श्रावस्ती, सोनभद्र, सुल्तानपुर, उन्नाव, वाराणसी।

अधिकारियों से मांगा गया जबाव

परियोजना निदेशक विजय किरन आनंद ने अनियमितताओं को लेकर लिखी चिट्टी में पूछा है कि छात्राओं की उपस्थिति प्रेरणा पोर्टल पर दर्ज नहीं हुई, इसके बावजूद बालिकाओं पर किए जाने वाले विभिन्न खर्चों की शत-प्रतिशत राशि का भुगतान दिखाया गया है। यह वित्तीय अनियमितता के दायरे में आता है।

प्रेरणा पोर्टल पर बालिकाओं की रोज की उपस्थिति के अनुसार ही भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। ऐसा न होने पर वार्डन, जिला समन्यवक (बालिका शिक्षा) या सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे।

बेसिक शिक्षा मंत्री पर उठी उंगलियां

यूपी के बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी पर भी इस कथित घोटाले को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। सतीश द्विवेदी पर करीबियों को सस्ते में जमीन दिलाने के आरोप का विवाद थमा भी नहीं था कि ये नया मामला सामने आ गया है। अगले साल यूपी में विधानसभा इलेक्शन भी है, ऐसे में विपक्षी दल भी खुलकर आरोप लगा रहे हैं। यूपी में अपने पैर जमाने की कोशिश में लगी आम आदमी पार्टी के सासंद संजय सिंह ने भी सतीश द्विवेदी पर 9 करोड़ के इस कथित घोटाले की चर्चा करते हुए आरोप लगाए। उन्होंने ट्वीट किया-

Sanjay Singh tweets

बता दें कि सतीश द्विवेदी पर महंगी जमीन को बेहद कम दाम में खरीदने के आरोप लग रहे हैं, विपक्ष का आरोप है कि द्विवेदी ने सवा करोड़ की जमीन महज 20 लाख रुपए में खरीद ली। आम आदमी पार्टी ने लोकायुक्त से इसकी भी शिकायत की है। बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी इससे पहले अपने भाई अरुण द्विवेदी की असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर हुई नियुक्ति को लेकर विवादों में घिर गए थे। मामला गरमाने पर उनके भाई ने असिस्टेंट प्रोफेसर पद से इस्तीफा दे दिया था।

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